मंदिर परिचय
श्री गिरधारीलालजी बेस्वाल द्वारा 1865 में स्थापित श्री देवी माता मंदिर का पावन इतिहास।

श्री देवी माँ
भड़ूंदा खुर्द में 1865 में प्राकट्य एवं स्थापित श्री देवी माँ का पावन स्वयंसिद्ध स्वरूप। माँ भक्तों की कुलरक्षा, भय-निवारण, सुख-समृद्धि और आरोग्य का वरदान देने वाली करुणामयी अधिष्ठात्री हैं।
1865 में मंदिर की स्थापना
Shri Girdharilalji Beswal · Mukundgarh, Rajasthan (1865)
श्री देवी माता मंदिर, भड़ूंदा खुर्द (झुंझुनूं, राजस्थान) का पावन इतिहास सन् 1865 (विक्रम संवत 1922) का है। शेखावाटी के ऐतिहासिक मुकुंदगढ़ निवासी परम श्रद्धालु श्री गिरधारीलालजी बेसवाल को स्वप्न में माँ भगवती ने प्रत्यक्ष दर्शन देकर वर्तमान मंदिर स्थल पर पावन खनन का दिव्य आदेश दिया।
अगाध श्रद्धा और भक्ति से प्रेरित होकर श्री गिरधारीलालजी बेसवाल ने निर्देशित पावन भूमि पर खनन आरंभ कराया। खनन के उपरांत माँ का तेजस्वी एवं स्वयंसिद्ध पावन स्वरूप प्राप्त हुआ, जिसे श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया। तदुपरांत लगभग तीन फीट के लघु पावन गर्भग्रह का निर्माण कर नित्य पूजन एवं आरती की मंगल परंपरा प्रारंभ की गई।
विगत 160 से अधिक वर्षों से बेसवाल परिवार की पीढ़ियों एवं स्थानीय भक्तों द्वारा मंदिर की अविरल सेवा, नित्य प्रातः-संध्या आरती और अखंड ज्योत की पावन परंपरा संजोई जा रही है। तीन फीट के लघु स्वरूप से आरंभ हुआ यह पावन स्थल आज समस्त भक्तों के लिए आस्था, कुलरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा का जाग्रत केंद्र बन चुका है।
मंदिर के पावन गर्भगृह में माँ भगवती का दिव्य अलंकृत स्वरूप सिंदूरी पोशाक, स्वर्णिम छत्र और ताजे पुष्पों से सुशोभित है। माँ के पावन चरणों में विराजित नक्काशीदार रजत सिंह वाहन शक्ति, मातृ-कृपा और धर्म की विजय का साक्षात प्रतीक है।
“आस्था और संकल्प से प्रारंभ हुआ पावन धाम · A Sacred Pilgrimage Founded in Faith”
From a sacred three-foot sanctum in 1865 to a revered spiritual sanctuary, Shree Devi Mata Mandir continues to radiate divine energy across Rajasthan and the nation.
पावन परंपराएं एवं मंदिर सेवा
पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोई गई भक्ति, वैदिक महायज्ञ एवं निरंतर जनसेवा की जाग्रत परंपराएं।
नित्य आरती एवं अखंड सेवा
1865 से अनवरत प्रातः एवं संध्या आरती, दिव्य पुष्प शृंगार और नित्य अखंड ज्योत के माध्यम से माँ भगवती की पावन आराधना।
वैदिक हवन एवं नवरात्रि महायज्ञ
शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि में शास्त्रीय विधि से वैदिक महायज्ञ, पावन आहुतियां और विजयादशमी व शरद पूर्णिमा पर भव्य पूर्णाहुति।
महाप्रसाद एवं अन्न क्षेत्र सेवा
प्रत्येक मुख्य पर्व एवं उत्सव पर समस्त दर्शनार्थियों, तीर्थयात्रियों एवं ग्रामीणों हेतु शुद्ध महाप्रसाद व निरंतर अन्न क्षेत्र का आयोजन।
कुलदेवी रक्षा एवं मांगलिक संस्कार
पीढ़ियों से कुलदेवी के रूप में पूजित; नवजात मुंडन, वैवाहिक आशीर्वाद एवं परिवार की सुख-समृद्धि हेतु श्रद्धालुओं का परम आस्था केंद्र।
प्रमुख पड़ाव (1865 – वर्तमान)
दिव्य स्वप्न एवं पावन प्राकट्य
मुकुंदगढ़ निवासी श्री गिरधारीलालजी बेसवाल को दिव्य स्वप्न दर्शन उपरांत भड़ूंदा खुर्द में पावन खनन द्वारा माँ की प्रतिमा प्राप्त हुई और 3 फीट का लघु मंदिर निर्मित हुआ।
शारदीय नवरात्रि एवं हवन परंपरा
वार्षिक शारदीय नवरात्रि महायज्ञ, वैदिक हवन और अखंड ज्योत की अविरल परंपरा का विस्तार, जिसमें दूर-दराज से भक्त शीश नवाने आते हैं।
ट्रस्ट का वैधानिक पंजीकरण
मंदिर व्यवस्था, संरक्षण एवं जनसेवा को पारदर्शी रूप देने हेतु 3 अगस्त 2022 को झुंझुनूं में 'श्री देवी माता मंदिर ट्रस्ट' का विधिवत पंजीकरण हुआ।
नीति आयोग दर्पण पोर्टल पंजीकरण
भारत सरकार के नीति आयोग एनजीओ दर्पण पोर्टल पर 21 दिसंबर 2024 को आधिकारिक पंजीकरण (आईडी: RJ/2024/0473705) प्राप्त हुआ।
संवर्धन एवं आधुनिक भक्त सेवा
मंदिर का भव्य विस्तार, डिजिटल पारदर्शिता, नियमित भंडारा, गौ सेवा और दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों हेतु आधुनिक सुविधाओं का विकास।
वर्तमान ट्रस्ट
श्री देवी माता मंदिर ट्रस्ट पूर्ण पारदर्शिता के साथ दैनिक सेवा, उत्सव और भक्तों की सुविधाओं का संचालन करता है।
Arun Gopiram Beswal
ट्रस्टी
Vinod Kumar Beswal
ट्रस्टी
Anshu Kumari
लेखाकार